धर्म, भाषा, संस्कृति, नस्ल आधारित भेदभाव सदैव एक समस्या रहा है और यह भेदभाव कम या अधिक सभी समाजो में देखा जा सकता है। फिर भी भारतीय संविधान में आरक्षण निति के माध्यम से महिलाओ और पिछड़े वर्गों को विशेष आधिकार दिए गये हैं प्रशन ये उठता है कि क्या आरक्षण निति वास्तव में इन वर्गों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है ये हमारे समाज की विडंबना ही है कि राजनितिक पार्टिया आरक्षण को एक हथियार के रूप इस्तेमाल कर रही हैं अनुसूचित जातियों और जनजातियो को पदोंन्नति में आरक्षण देने के पीछे यूपीए सर्कार 2014 के चुनाव के लिए निम्न जाति के वोट बैंक को अपनी तरफ करना चाहती है पदोंन्नति में आरक्षण बिलकुल गलत है इससे अयोग्य व्यक्ति योग्य व्यक्ति की जगह ले लेगा। जिससे योग्यता जैसे मानदंड मात्र शब्दों में ही दबकर रह जायेंगे ।


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