उतर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी पूरे एक दिन का वक्त बाकी है क्या होगा फैसला ? किसी होगी सरकार ?,अभी तक किसी को नही पता लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए रविवार से ही गठबंधन बनाने शुरू हो गये है केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने तो कांग्रेस-बसपा गठबंधन की हिमायत कर दी है। हालांकि कांग्रेस ने बेनी वर्मा के बयान से पल्ला झाड़ते हुए इसे उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया है रविवार को केंद्रीय मंत्री बेनी वर्मा लखनऊ में थे।उन्होंने कहा कि कांग्रेस-रालोद गठबंधन को करीब सौ सीटें मिलने की सम्भावना है और लगभग इतनी ही सीटें बसपा की भी आने वाली हैं। कांग्रेस जो फैसला करेगी, उसमें वह भी शामिल रहेंगे लेकिन वह इस राय के हैं कि मायावती तो मुलायम सिंह यादव से हजार गुना बेहतर हैं। अगर कोई उनकी राय ले तो वह बसपा के साथ गठबंधन को ज्यादा उचित मानते हैं। एनआरएचएम घोटाला और कुछ मंत्रियों ने भ्रष्टाचार न किया होता मायावती का शासन मुलायम सिंह यादव के शासन से बहुत अच्छा था। मुलायम सिंह यादव की सरकार में सिपाहियों की भर्ती में पैसे चले थे लेकिन मायावती की सरकार में इमानदारी से भर्ती हुई। आपको बताते चले कि राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि बेनी वर्मा ने जो विकल्प सुझाया है, उसकी सम्भावना को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है।
भाजपा जिस तरह से बसपा से किसी भी कीमत पर गठबंधन न करने पर अड़ी हुई है, उसमें बसपा के पास कांग्रेस से दोस्ती करने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं बचता है।मुलायम सिंह यादव को सत्ता में रोकने के लिए कांग्रेस और बसपा को हाथ मिलाना मजबूरी हो सकती है। उधर बेनी वर्मा के बयान पर बसपा की खामोशी को आश्चर्यजनक माना जा रहा है। खामोशी के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। अमूमन कांग्रेस नेताओं के बयान पर बसपा अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने में कभी देर नहीं लगाती है लेकिन रविवार को बेनी वर्मा के बयान पर बसपा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की।
दूसरी और भाजपा कि नजर छोटे दलों पर आधिक है मतदान बाद सर्वेक्षण की जो रिपोर्ट मीडिया में आई हैं, भाजपा उससे कतई निराश नहीं है। पार्टी के बड़े नेता छह मार्च को आश्चर्यजनक नतीजे आने की बात कह रहे हैं। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने रविवार को ' कहा कि सत्ता के लिए कांग्रेस, बसपा और सपा से किसी प्रकार का कोई गठबंधन नहीं होगा। इस सवाल पर कि इसका मतलब छोटे दलों से गठबंधन हो सकता है, उन्होंने कहा हमारा जवाब सिर्फ यही है कि कांग्रेस, बसपा, सपा से कोई समझौता नहीं होगा।बहुमत की लिए जरूरी जुटान करने को भाजपा की नजर जद यू, अपना दल, जनक्रांति पार्टी जैसे छोटे दल के साथ ही साथ मजबूत निर्दलीय प्रत्याशियों पर टिकी हुई हैं।
वही दूसरी और मायावती ने भी नतीजों और उससे आगे की सम्भावनाओं पर विचार-विमर्श करने के लिए सभी मंत्रियों के साथ बैठक की। सूत्रों का कहना है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी रविवार को लखनऊ में मौजूद रहे।
किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में सरकार गठन के लिए क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं, इसको लेकर कयास लग रहे हैं।विकल्प एक : सपा-कांग्रेस-रालोद, विकल्प दो- सपा-रालोद-छोटे दल, विकल्प तीन- काग्रेस-रालोद-बसपा, विकल्प चार- बसपा-रालोद-छोटे दल, विकल्प पांच- भाजपा-बसपा। भाजपा की तरफ से बसपा से दोस्ती की सम्भावना को सिरे से खारिज किया जा रहा है लेकिन राजनीतिक हलकों में उस गठबंधन की सम्भावना जताई जा रही हैं।

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