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Saturday, May 5, 2012

कांग्रेस अटका रही प्रणव की राह में रोड़े

Image Loadingकांग्रेस  और सरकार के अन्दर एक बड़ा तबका ऐसा है जो प्रणव को राष्ट्रपति बनाए जाने के पक्ष में नहीं है राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को व्यापक समर्थन मिल रहा है सपा और बसपा जैसे दलों को भी उनकी उम्मीदवारी पर एतराज नहीं हैं. इतना ही नहीं राजग के घटक जदयू और अन्नाद्रमुक तथा बीजद का भी उनको समर्थन मिल सकता है. इन सबके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लगाएगा.
. संप्रग के सभी घटक प्रणव मुखर्जी के पक्ष में हैं. द्रमुक से लेकर तृणमूल और राकांपा जैसे घटक चाहते हैं कि प्रणव दा राष्ट्रपति भवन की शोभा सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अन्दर प्रणव की उम्मीदवारी को लेकर एक राय नहीं है. जहां कुछ लोगों की दिली इच्छा है कि पार्टी की लंबे समय तक सेवा के लिए यह सही समय है, जब उनकी वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में बैठाया जाए तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो उनके तेजतर्रार राजनीतिक कौशल के चलते नहीं चाहते हैं कि प्रणव दा राष्ट्रपति बने.इन सबसे अलग जो महत्वपूर्ण तथ्य है वह यह है कि कांग्रेस अकेले अपने दम पर अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति नहीं चुनवा सकती है. उसे घटक दलों और सपा-बसपा के समर्थन की जरूरत पड़ेगी ही. ऐसे में घटक दलों और सहयोगी दलों के प्रणव के पक्ष में आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व के पास भी ज्यादा विकल्प नहीं हैं.
  बाहर से जिस तरह का समर्थन प्रणव को मिल रहा उसमें यदि वह उम्मीदवार बनाए जाते हैं तो राष्ट्रपति बनना महज एक औपचारिकता रह जाएगी. राष्ट्रपति के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फैक्टर ‘थ्री-एम’ (मुलायम, ममता और मायावती) के उनके पक्ष में आने के बाद प्रणव की दावेदारी को और बल मिला है.

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