पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पीएम यूसुफ रजा गिलानी को अवमानना का नोटिस जारी कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
जरदारी को बचने में फसी पी एम् की गर्दन का क्या होगा कोर्ट के निर्देश देने के बावजूद नही सुधरे गिलानी, अब क्या होगा पाक में होने वाले इलेक्शन का .
बता दें कि पिछले सप्ताह शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार एनआरओ मुद्दे पर उसके आदेश की अवज्ञा करती रहेगी तो प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत ने कहा था कि गिलानी पद ग्रहण करते समय ली गई शपथ का सम्मान न करने के कारण ईमानदार व्यक्ति नहीं हो सकते। शीर्ष अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर राष्ट्रपति अपने पद संबंधी शपथ का उल्लंघन करते हैं तो उनको भी इसी नतीजे का सामना करना पड़ सकता है।
अदालत ने कहा था कि गिलानी पद ग्रहण करते समय ली गई शपथ का सम्मान न करने के कारण ईमानदार व्यक्ति नहीं हो सकते। शीर्ष अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर राष्ट्रपति अपने पद संबंधी शपथ का उल्लंघन करते हैं तो उनको भी इसी नतीजे का सामना करना पड़ सकता है।
रसूख वाले लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को वर्ष 2007 में तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रीय सुलह सहमति अध्यादेश (एनआरओ) के तहत बंद कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने एनआरओ रद्द करने के बाद से ही सरकार पर दबाव बना रखा है। एनआरओ के चलते वर्ष 2009 में राष्ट्रपति जरदारी तथा 8,000 अन्य लोगों को फायदा हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट का सरकार पर दबाव है कि वह स्विस अधिकारियों को जरदारी के खिलाफ धनशोधन के मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखे। लेकिन सरकार ने यह कहते हुए ऐसा करने से इंकार कर दिया कि राष्ट्रपति को संविधान के तहत छूट मिली हुई है।
जरदारी खुद कह चुके हैं कि सरकार तब तक स्विस अधिकारियों से संपर्क नहीं करेगी जब तक वह पद पर हैं क्योंकि यह कदम उनकी दिवंगत पत्नी पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के खिलाफ सुनवाई जैसा होगा। एनआरओ से लाभान्वित होने वालों में बेनजीर भी शामिल थीं।
सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कुछ सहयोगियों और पूर्व मंत्री ऐतजाज अहसन जैसे पार्टी के कुछ नेताओं का सुझाव है कि सरकार मामले फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिख कर अपने उपर पड़ रहा दबाव कुछ कम कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का सरकार पर दबाव है कि वह स्विस अधिकारियों को जरदारी के खिलाफ धनशोधन के मामले फिर से खोलने के लिए पत्र लिखे। लेकिन सरकार ने यह कहते हुए ऐसा करने से इंकार कर दिया कि राष्ट्रपति को संविधान के तहत छूट मिली हुई है।
जरदारी खुद कह चुके हैं कि सरकार तब तक स्विस अधिकारियों से संपर्क नहीं करेगी जब तक वह पद पर हैं क्योंकि यह कदम उनकी दिवंगत पत्नी पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के खिलाफ सुनवाई जैसा होगा। एनआरओ से लाभान्वित होने वालों में बेनजीर भी शामिल थीं।
सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कुछ सहयोगियों और पूर्व मंत्री ऐतजाज अहसन जैसे पार्टी के कुछ नेताओं का सुझाव है कि सरकार मामले फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिख कर अपने उपर पड़ रहा दबाव कुछ कम कर सकती है।
जरदारी को बचने में फसी पी एम् की गर्दन का क्या होगा कोर्ट के निर्देश देने के बावजूद नही सुधरे गिलानी, अब क्या होगा पाक में होने वाले इलेक्शन का .
फ़िलहाल गिलानी पर अवमानना का कैसे चलाया जायेगा. गिलानी के पास १९ जनवरी का आखिरी दिन है जब वह अपनी सफाई पेश कर सकता है कोर्ट ने १९ जनवरी को गिलानी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है.
कानून मंत्री का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसका पालन अवश्य कराया जायेगा.

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