प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा नहीं खोलने की जिद पर अड़ने पर करारा झटका देते हुए शीर्ष अदालत ने उन पर अदालत की अवमानना का आरोप तय कर दिया। ताजा हालात के मद्देनजर 59 वर्षीय गिलानी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। गिलानी ने हालांकि खुद को बेकसूर बताया है। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ अवमानना का आरोप तय किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने के अपने आदेश का पालन नहीं करने को अदालत की अवमानना माना है। यदि गिलानी को दोषी ठहराया जाता है तो उन्हें छह माह की जेल हो सकती है। इसके अलावा वह पांच वर्ष तक किसी भी सरकारी पद पर नहीं रह सकेंगे। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया तो वह खुद ही संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे
सुनवाई के दौरान सात सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस नसीर-अल-मुल्क ने दो पृष्ठों का आरोप पत्र पढ़ा। जस्टिस ने गिलानी से पूछा कि क्या वह खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानते हैं और उन्हें समझते है? गिलानी ने जवाब दिया, 'हां, मैंने आरोप पत्र पढ़ा है और उसे समझा है।' न्यायाधीश ने फिर गिलानी से पूछा कि क्या वह अपना दोष स्वीकार करते हैं? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'नहीं'।
सुनवाई के दौरान सात सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस नसीर-अल-मुल्क ने दो पृष्ठों का आरोप पत्र पढ़ा। जस्टिस ने गिलानी से पूछा कि क्या वह खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानते हैं और उन्हें समझते है? गिलानी ने जवाब दिया, 'हां, मैंने आरोप पत्र पढ़ा है और उसे समझा है।' न्यायाधीश ने फिर गिलानी से पूछा कि क्या वह अपना दोष स्वीकार करते हैं? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'नहीं'।
कोर्ट ने अगली सुनवाई केलिए 22 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। बचाव पक्ष से 27 फरवरी तक सुबूत पेश करने को कहा गया है। इसे अगले दिन रिकॉर्ड किया जाएगा और इसके बाद गिलानी पर मुकदमे की तारीख तय किए जाने की संभावना है। हालांकि प्रारंभिक सुनवाई में प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत पेशी से छूट रहेगी।
वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश [एनआरओ] के जरिये करीब आठ हजार लोगों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले खत्म किए गए थे। इसी का लाभ जरदारी और गृह मंत्री मलिक को भी मिला था।सुप्रीम कोर्ट सरकार पर दबाव बना रही है कि वह जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड में कथित मनी लॉडि्रंग के मामले को फिर से खोले। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में एनआरओ को रद कर राष्ट्रपति समेत सभी लोगों के खिलाफ मामले फिर से खोलने के निर्देश दिए थे। गिलानी इससे पहले 19 जनवरी को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हुए थे।

wait kyu kar rhe hai turant hta do
ReplyDeleteare sab jhute h bekasoor hote to itne din tak dusre desh mei chupkar nhi baithte
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