अमेरिका में हिंदू समाज के राष्टपिता महात्मा गांधी के 'बैप्टाइजेशन' (ईसाई धर्म की दीक्षा देना) की खबर से बेहद नाराज है। खबर है कि चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे सेंट्स (एलडीएस) ने प्रतीकात्मक ढंग से बापू को बैप्टाइज किया है।इस खबर से अमेरिका के हिंदू समाज में गुस्सा है यह दुनिया भर में फैले सौ करोड़ हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुंचाने वाली असंवेदनशील घटना है।' इस चर्च का मुख्यालय साल्ट लेक सिटी में है। यह बात तब सामने आई जब साल्ट लेक की शोधकर्ता हेलेन रेडकी ने एलडीएस की फैमिली सर्च सेवा के कुछ पेज राजन जेड को ईमेल किए। ईमेल पर भेजे गए इन पेजों में बताया गया कि मोहनदास करमचंद गांधी का 27 मार्च, 1996 को साल्ट लेक सिटी में बैप्टाइजेशन किया गया था। 17 नवंबर, 2007 को ब्राजील के साउ पालो में बैप्टाइजेशन का कन्फर्मेशन किया गया। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। 4 फरवरी, 2009 को ब्राजील के साउ पालो में इनिशिएटरी की औपचारिकता पूरी की गई थी। इसमें गांधी जी के माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों के नाम भी शामिल हैं। रेडकी का कहना है कि उन्होंने इस रिकॉर्ड को 16 फरवरी को देखा था। लेकिन उसके बाद से यह डेटाबेस में उपलब्ध नहीं है। जिस जगह पर गांधी जी के बारे में ब्योरा दर्ज था, वहां अब अज्ञात व्यक्ति की सूचना दी जा रही है। रैडकी का कहना है कि इस तरह से ब्योरे का गायब होना बहुत अजीब है।राजन जेड ने 24 फरवरी को इस मामले में एलडीएस को चिट्ठी लिखी है। लेकिन अभी तक इसका कोई जवाब नहीं आया है

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