सिर्फ सहारा के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन ने सोमवार को कहा कि स्पांसरशिप और पुणे वॉरियर्स टीम से हटने को लेकर सहारा इंडिया के साथ जारी मतभेदों को सुलझाने को लेकर वह एक कदम आगे बढ़ने को तैयार हैं
सहारा इंडिया इस बात को लेकर नाराज था कि बीसीसीआई ने युवराज सिंह की नीलामी की कीमत को आईपीएल-5 की नीलामी में शामिल करने के उसके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जबकि वह बीते 11 साल से बीसीसीआई के साथ बतौर स्पांसर जुड़ा हुआ है।सहारा ने इस महीने की शुरुआत में बीसीसीआई से नाराज होकर लाखों डॉलर कीमत के स्पांसरशिप करार से हटने के साथ-साथ आईपीएल की पुणे वारियर्स फ्रेंजाइजी से भी खुद को अलग कर लिया था।आईपीएल के नियमों के तहत पुणे वॉरियर्स टीम को युवराज का स्थानापन्न मिल सकता था। श्रीनिवासन ने साफ किया कि किसी एक फ्रेंचाइजी मालिक के फायदे के लिए आईपीएल के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
सहारा ने 2010 में पुणे फ्रेंचाइजी को 1702 करोड़ रुपये में हासिल किया था। अगर सहारा पुणे फ्रेंचाइजी से हाथ खींचता है तो बीसीसीआई को कुल 2234 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। पुणे फ्रेंचाइजी आईपीएल की सबसे महंगी फ्रेंचाइजी है।
श्रीनिवासन के अनुसार, बीसीसीआई की कार्यकारिणी में सहारा इंडिया की चिंताओं पर चर्चा हुई। हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हम इस मामले को लेकर एक कदम आगे बढ़ने को तैयार हैं लेकिन किसी के फायदे के लिए नियमों में ढील नहीं दी जाएगी।
हमने सहारा इंडिया को बहुत ही सकारात्मक जवाब दिया है और यह जवाब आईपीएल नियमों के दायरे में रहकर दिया गया है। हम नियमों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि आईपीएल की प्रतिष्ठा और गरिमा को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है। हमें उम्मीद है कि सहारा हमारे पक्ष को समझेगा और यह मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या पुणे टीम को युवराज का स्थानापन्न मिलेगा, श्रीनिवासन ने कहा, मैं पहले भी कह चुका हूं कि युवराज का स्थानापन्न हासिल करने के लिए पुणे टीम स्वतंत्र है। यह कोई मुद्दा है ही नहीं।
बीसीसीआई के मुताबिक वह पुणे टीम के प्रायोजक के तौर पर सहारा की चिंताओं पर चर्चा के लिए तैयार है और अगर सहारा अपने स्थान पर किसी अन्य को पुणे फ्रेंचाइजी का प्रायोजक बनाता है तो भी उसे कोई दिक्कत नहीं होगी।
सहारा इंडिया ने एक जुलाई, 2010 को बीसीसीआई के साथ स्पांसरशिप सम्बंधी नया करार किया था जो 31 दिसम्बर 2013 तक जारी रहना था। इसके अंतर्गत सहारा को प्रत्येक टेस्ट मैच, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 मैच के बदले बीसीसीआई को 3.34 करोड़ रुपये देने थे। इस करार की कुल कीमत 532 करोड़ रुपये थी।
सहारा इंडिया के हटने के बाद भारतीय टीम का प्रायोजक कौन होगा, इस सवाल के जवाब में श्रीनिवासन ने कहा कि बीसीसीआई को प्रायोजकों की कमी नहीं।बकौल श्रीनिवासन, भारतीय टीम के प्रायोजक के तौर पर सहारा की चिंताओं पर हमने चर्चा की और उसे अपने जवाब से अवगत करा दिया। अब हमें सहारा के पक्ष का इंतजार है। जहां तक दूसरे प्रायोजकों की बात है तो हमें इसकी कमी नहीं है। प्रायोजक बदलने से बीसीसीआई को कोई नुकसान नहीं होगा।


its a really big company.why this company do this
ReplyDeletekoi nhi sahara jayegi koi or company aayegi vase bhi team india ko log pasand karte h sahara ko nhi
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